बेटा बना ‘एम्बुलेंस’: रायबरेली जिला अस्पताल में बीमार पिता को पीठ पर ढोने को मजबूर, सिस्टम पर उठे सवाल
रायबरेली के जिला अस्पताल से सामने आई एक मार्मिक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। महाराजगंज क्षेत्र के ओथी गांव से आए एक लाचार बेटे को जब अस्पताल में स्ट्रेचर या व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं हुई, तो वह अपने बीमार पिता को पीठ पर लादकर वार्ड-दर-वार्ड भटकने को मजबूर हो गया।
यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावों पर सवालिया निशान है। करोड़ों रुपये के बजट और सुविधाओं के वादों के बीच, एक आम आदमी को अपने परिजन की जान बचाने के लिए खुद ही ‘एम्बुलेंस’ बनना पड़ा।
मौके पर मौजूद लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि अस्पताल में अक्सर इस तरह की लापरवाही देखने को मिलती है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारी सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित रह गई है?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।